पालघर विरार हादसा: अवैध इमारत गिरने से 15 की मौत, बिल्डर गिरफ्तार

भोजराज नावानी
भोजराज नावानी

महाराष्ट्र के पालघर जिले के विरार इलाके में जो हुआ, उसने पूरे शहर को हिला दिया। एक गैरकानूनी चार मंज़िला इमारत का पिछला हिस्सा अचानक गिर पड़ा, और पलभर में 15 जिंदगियां मलबे के नीचे दफन हो गईं।

कैसे हुआ हादसा?

 विरार के रामाबाई अपार्टमेंट का पिछला हिस्सा भरभराकर गिर गया। यह इमारत 2012 में बिना किसी मंज़ूरी के बनाई गई थी, जिसे वसई-विरार नगर निगम (VVMC) पहले ही “अवैध” घोषित कर चुका था।

हादसे के बाद पुलिस ने तत्काल बिल्डर को गिरफ्तार कर लिया है।

NDRF की रेस्क्यू टीम और प्रशासन मुस्तैद

  • दो टीमें NDRF की मौके पर पहुंचीं।

  • शुरुआती घंटों में इलाके की तंग गलियों की वजह से मशीनें नहीं पहुंच सकीं, इसलिए रेस्क्यू ऑपरेशन हाथों से शुरू हुआ।

  • बाद में मशीनरी के साथ तेजी से मलबा हटाया गया

अब तक 17 लोगों का पता चला है, जिनमें 15 की मौत हो चुकी है और एक गंभीर रूप से घायल है।

चॉलें खाली, बड़ी त्रासदी टली

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी विवेकानंद कदम ने बताया कि जिस चॉल पर इमारत गिरी थी, वह खाली थी, जिससे और बड़ा हादसा टल गया।

आसपास की चॉलों को भी तुरंत खाली कराकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है।

अवैध निर्माण बना मौत की वजह

रामाबाई अपार्टमेंट में कुल 50 फ्लैट थे, जिनमें से 12 फ्लैट उसी हिस्से में थे जो ढह गया। VVMC ने साफ कर दिया है कि यह पूरी इमारत अवैध थी, और बिल्डर ने बिना किसी मंजूरी के निर्माण किया। हादसे के बाद कई परिवार बेघर हो गए हैं। प्रशासन ने उन्हें चंदनसर समाजमंदिर में अस्थाई रूप से ठहराया है, जहां भोजन, पानी, दवाइयां और आवश्यक सुविधाएं दी जा रही हैं।

जब तक अवैध निर्माण पर सख्ती नहीं होगी, तब तक हादसे दोहराए जाएंगे।
और अफ़सोस ये कि क़ीमत जानों से चुकानी पड़ेगी।

पालघर हादसा एक चेतावनी है कि कानून तोड़ने का नतीजा सिर्फ जुर्माना नहीं, जानलेवा भी हो सकता है। अब VVMC और सरकार पर जिम्मेदारी है कि वे इस तरह के अवैध निर्माण को तुरंत ढहाएं, और लापरवाह अधिकारियों को भी जवाबदेह ठहराएं।

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